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मंगलवार, जुलाई 12, 2011

आप भी अपने मित्रों को बधाई भेजें

 "आपको मुबारक हो" के माध्यम से आप अपने स्कूलों व व्यापारिक मित्रों को उनके जन्मदिन, शादी की सालगिरह, उनके द्वारा कोई वाहन खरीदने आदि और अन्य किसी भी प्रकार की "बधाई" का संदेश नाममात्र शुल्क में भेज सकते हैं. आपके मित्र हैरान हो जायेंगे ! आप अपना संदेश कम से कम 5 दिन पहले भेज दें. किसी भी प्रकार की अधिक जानकारी के लिए मुझे संपर्क करें. रमेश कुमार जैन @ सिरफिरा : 9910350461, 9868262751, 011-28563826
नोट : आप संदेश के साथ फोटो भी प्रकाशित करवा सकते हैं. आपको पासपोर्ट साइज़ की फोटो व संदेश (हिंदी में ) ईमेल द्वारा भेजना होगा. "शकुन्तला प्रेस ऑफ़ इंडिया प्रकाशन" द्वारा आप और आपके मित्र को एक-एक ईमेल भेजे जाने के साथ ही आपके मित्र को एक SMS भेजकर उपरोक्त ब्लॉग देखने का निवेदन किया जायेगा.

शनिवार, फ़रवरी 05, 2011

जीवन के उतराव-चढ़ाव का उल्लेख करती एक आत्मकथा

भ्रष्ट अंधी-बहरी न्याय व्यवस्था से प्राप्त अनुभवों की कहानी का ही नाम है

सच का सामना

वाह ! क्या कहने है? किसी ने क्या खूब पक्तियां कही है कि-प्यार एक अहसास है,एक ऐसा एहसास जिसने लाखों लोगों के सपने संजोये, लाखों मुर्दा दिलों को जीने की राह दिखाई....... एक ऐसा एहसास जिसने लाखों लोगों को जीते जी मार दिया, वे ना जी सके और ना ही मर सके, बस एक जिन्दा लाश बनकर रह गए......प्यार जो पूजा भी है...... प्यार जो जिन्दा इंसान की मौत का कारण भी है और उसका कफन भी है... प्यार हरेक के लिए कुछ अलग, कुछ जुदा, कुछ खट्टा और कुछ मीठा है. कुछ लोग मोहब्बत करके हो जाते हैं बर्बाद, कुछ लोग मोहब्बत करके कर देते हैं बर्बाद.

                        मैंने ऐसा अनुभव किया कि-अक्सर लोग दूसरों के जीवन में ताकझांक की कोशिश भी खूब करते/होती हैं. लेकिन अपने दांपत्य जीवन की परतें खोलने का प्रयास कोई नहीं करता. मगर कुछ महिलाएं अपनी करीबी सहेलियों से थोड़ा बहुत शेयर भी कर लेती है. लेकिन पुरुष इस पर कुछ कहना अपनी प्रतिष्ठा के खिलाफ समझता है. वह अपने दांपत्य जीवन को लोहे की जंजीरों से जकड़े रखना चाहता है. मगर कभी-कभी ऐसा होता है कि-एक सभ्य और सम्मानित पुरुष वेकसूर होते हुए भी कसूरवार ठहरा दिया जाता है. तब वो पुरुष अपने दांपत्य जीवन की परतें खोलने के लिए मजबूर हो जाता है.

                       मैंने पूरी ईमानदारी से दांपत्य जीवन की डोर चलाने की बहुत कोशिश की. मगर दूषित बीमार मानसिकता वाली पत्नी और लालची सुसरालियों की साज़िश के साथ ही फर्जी केस दर्ज करने वाले अधिकारी और रिश्वत मांगते पुलिस अधिकारी के अलावा सरकारी वकील,धोखा देते वकीलों की कार्यशैली, भ्रष्ट अंधी-बहरी न्याय व्यवस्था से प्राप्त अनुभवों की कहानी का ही नाम है
"सच का सामना"
शकुंतला प्रेस ऑफ़ इंडिया प्रकाशन परिवार के मैनेजिंग एडिटर एंड पब्लिशिंग डायरेक्टर रमेश कुमार जैन उर्फ़ सिरफिरा के प्रेम-विवाह करने से पहले और बाद के जीवन में आये उतराव-चढ़ाव का उल्लेख करती एक आत्मकथा
"सच का सामना"
उपन्यास
के रूप में बहुत जल्द ही प्रकाशित होगी.
एक महत्वपूर्ण वैवाहिक सलाह :- आप पिछले विवादों को बार-बार कुरेदकर एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करें. जो भी मामला या विवाद एक बार सुलझा लें उसके बाद उसे भूल जाएँ. लेकिन कहीं बार कुछ महिलाएं पुराने विवादों को बार-बार कुरेदकर अपने परिवार को अपने हाथों से उजाड़ चुकी हैं. आप कदपि ऐसा करें.
# निष्पक्ष, निडर, अपराध विरोधी आजाद विचारधारा वाला प्रकाशक, मुद्रक, संपादक, स्वतंत्र पत्रकार, कवि लेखक रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" फ़ोन:9868262751, 9910350461

शनिवार, जनवरी 01, 2011

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ!


नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ!
आप सभी पाठकों / दोस्तों को "शकुन्तला प्रेस ऑफ़ इंडिया प्रकाशन" परिवार की ओर से नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं! आप व आपके परिवार के लिए नववर्ष 2011 मंगलमय हो! इन्हीं शब्दों के साथ ही .....

सुनहरे सपनों की झंकार, लाया है नववर्ष
खुशियों के अनमोल उपहार लाया है नववर्ष
आपकी राहों में फूलों को बिखराकर लाया है नववर्ष
महकी हुई बहारों की ख़ुशबू लाया है नववर्ष
अपने साथ नयेपन का तूफान लाया है नववर्ष
स्नेह और आत्मीयता से आया है नववर्ष
सबके दिलों पर छाया है नववर्ष
आपको मुबारक हो दिल की गराईयों से नववर्ष!
नए साल की नई सुबह, लाये नई खुशियों की सौगात, 
सुख-समृध्दी का हो साम्राज्य, सपनों को मिले एक नया आयाम!
यह नववर्ष शुभ हो, नई खुशियों को लाये! 
यह साल मनमोहक फूलों की तरह से हो आपका जीवन!!

शुक्रवार, नवंबर 05, 2010

शुभ दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ!

हर आंगन, हर चौखट पर, हर धड़कन, हर उम्मीद पर, हर शब्द और हर पन्ने पर जले प्यार की बाती "शकुन्तला प्रेस" परिवार की ओर से हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी शुभ दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ! 
आपके घर में रौशनी की जगमग हो. स्वादिस्ट पकवान बनें और मिठाइयों का आदान-प्रदान हो. पूजा के दौरान श्री लक्ष्मी माता का आगमन हो. आपके चारों खुशियों का वातावरण हो. दु:खों-ग़मों और मुसीबतों का बेसरा बस मेरे घर तक ही सीमित हो. आपका व आपके परिवार का इनसे दूर-दूर तक कोई वास्ता भी न हो. इन्हीं मंगल कामनाओं के साथ...........एक फिर से "शकुन्तला प्रेस ऑफ़ इंडिया प्रकाशन" परिवार और "शकुन्तला एडवरटाईजिंग एजेंसी" की ओर से आप व आप सभी के परिवारों को दीपावली, गोबर्धन पूजा और भैया दूज की हार्दिक शुभकामनायें
#आपका अपना शुभाकांक्षी-निष्पक्ष, निडर, अपराध विरोधी आजाद विचारधारा वाला प्रकाशक, मुद्रक, संपादक, स्वतंत्र पत्रकार, कवि लेखक  रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" फ़ोन:9868262751, 9910350461email: sirfiraa@gmail.com, महत्वपूर्ण संदेश-समय की मांग, हिंदी में काम. हिंदी के प्रयोग में संकोच कैसा,यह हमारी अपनी भाषा है. हिंदी में काम करके,राष्ट्र का सम्मान करें.हिन्दी का खूब प्रयोग करे. इससे हमारे देश की शान होती है. नेत्रदान महादान आज ही करें. आपके द्वारा किया रक्तदान किसी की जान बचा सकता है.

शनिवार, अक्टूबर 23, 2010

जन्मदिन की मुबारकबाद

आज  दिनांक 23/10/2010 को मैं अपने भतीजे कार्तिक जैन यानि अपने सगे भाई सतपाल जैन के बेटे का जन्मदिन की खुशियों मनाने के साथ ही कार्तिक जैन को उसको 11 वें जन्मदिन उत्सव पर समस्त "शकुन्तला प्रेस ऑफ़ इंडिया प्रकाशन" परिवार की ओर से जन्मदिन की मुबारकबाद देते हुए ढ़ेरों शुभकामनायें प्रेषित करता हूँ. इन्हीं शब्दों के साथ ही ................

                   "नववर्ष खुशियों भरा मिलें"

इस साल का हर दिन  तुम्हें खुशियों भरा मिलें
जब भी मुझे मिलो तो बस हँसता हुआ मिलो
जिस राह भी तू जाये मंजिल की तलाश में
खुदा करें तुझे तेरी मंजिल का हर निशां मिले
हर सुबह तुझे इक नई ख़ुशी मिले
आपके जीवन का हर पल यूँ ही फूले-फले
पतझड़ कभी जो आये तो दुआ है मेरी
तुझे सदा फूलों-सा महकता चमन मिले.

बुधवार, अक्टूबर 20, 2010

जन्मदिन की मुबारकबाद

जन्मदिन उत्सव
आज 20/10/2010 को मैं अपना जन्मदिन मनाने के साथ ही अपनी भतीजियों जोकि मेरे मामा जी की पोती क्षुती जैन पुत्री श्री सतीश जैन, रोहिणी निवासी और मेरी मौसी की पोती सिया जैन पुत्री शीतल जैन, जींद-हरियाणा निवासी को समस्त "शकुन्तला प्रेस ऑफ़ इंडिया प्रकाशन" परिवार की ओर से जन्मदिन की मुबारकबाद देते हुए ढ़ेरों शुभकामनायें प्रेषित करता हूँ. जो आज के दिन ही अपना क्रमश: 16 पहला जन्मदिन उत्सव मना रही हैं. इन्हीं शब्दों के साथ ही ................
आपके जन्मदिन उत्सव पर
आज तुम जिंदगी की राहों में
छोड़ आई हो कितने ढेर से दिन
अब उन्हें ढूँढना भी मुशिकल है
अब वहां लौटना भी नामुमकिन.
यह नया साल की जिंदगी तुम्हें
झिलमिलाते चिराग दे जाये
जिनके एहसास से हो दुःख तुम्हें
हसरतों के वो दाग ले जाये
फिर जब आये यह जन्मदिन उत्सव
तुम मेरा गीत गुनगुना लेना
यूँ ही जब शाम डूबने को हो
याद का एक "दिया" (दीपक) जला लेना.
 रब से दुआ कर रहे हैं हम,
आपके पास आये कोई गम
आपके जन्मदिन पर खुदा से  
यह मांगते हैं हम,
 हर कामयाबी चूमें आपके कदम". 
"हो मुबारक यह जन्मदिन तुम्हें, 
जहाँ तुम्हारा आबाद रहे,
जब तक दुनियां चलती रहे,
तब तक तुम्हारी याद रहे"

ब्लॉग का परिचय


जन्म, मृत्यु और विवाह
 जन्म यानि उत्पति. मृत्यु यानि समाप्त होना. विवाह यानि दो आत्माओं का मिलन. किसी भी प्राणी का जन्म होना.चाहे वो स्त्री-पुरुष के रूप में या अन्य किसी भी रूप में हो. उसके जन्म का समय, तारीख और स्थान सब परम पिता भगवान के हाथ में है.जिसे हम अनेकों नाम और रूपों से जानते हैं.इसी प्रकार से मृत्यु का समय, तारीख,स्थान और कारण भी जन्म होने के बाद ही परम पिता भगवान के खातों (एकाऊंट) में दर्ज हो जाता है. हर जन्म लेने वाले प्राणी द्वारा किये पाप पुन्य कर्मों के अनुसार ही आयु निर्धारित होती है. जहाँ एक ओर जन्म हेतु गर्भ में जब एक बीज अंकुरित होता है.तब चारों ओर खुशियों का संदेश लेकर आता है. बच्चे का जन्म होने के बाद ही एक महिला को मातृत्व प्राप्त होता है और ऐसा भी कहा जाता है की बच्चे के जन्म के बाद ही एक महिला संपूर्ण रूप से नारी बन जाती है.हम जहाँ एक ओर जन्म पर खुशियाँ मानते हैं.वहीँ दूसरी ओर मृत्यु पर (एकाध अपवाद छोड़ दें) शोक बनाया जाता है. जन्म की तारीख को "जन्मदिन" और मृत्यु की तारीख को "पूण्यतिथि" के रूप में जाना जाता है. जन्मदिन वाले दिन हमें फ़ोन,एसएम्एस, ईमेल और हर मिलने वाले व्यक्ति से ढ़ेरों शुभकामनाओं के साथ ही "मुबारकबाद" मिलती हैं. पूण्यतिथि वाले दिन सभी निकट संबंधियों के मन-मस्तिक में मृत व्यक्ति की यादों के चलचित्र चलते रहते हैं और आँखों के नम होने के साथ ही मौहाल गमिन होता है. संसारिक दुनियां की निरंतर विकास प्रक्रिया चलती रहे. इसीलिए एक स्त्री और पुरुष को विवाह के बंधन में बांधने की रिवाज़ है. जिसे विवाह या शादी कहा जाता है. विवाह-दो शरीरियों का मिलन ही नहीं, बल्कि दो आत्माओं का मिलन भी है. दो आत्माओं के मिलन की तारीख को हम सभी शादी की "सालगिरह" कहे या "वर्षगांठ" के  रूप में मानते हैं. दो आत्माओं के मिलन के बाद ही दांपत्य जीवन में आये उतराव-चढ़ाव के 365 दिनों को एक वर्ष के रूप में मानते हैं. जो भी दंपत्ति अपने दांपत्य जीवन में आये उतराव-चढ़ावों का विवेक, धैर्य और सहनशीलता से सामना करते हैं, वो सफल दंपत्ति कहलाते हैं
 आज हाईटेक दुनियां की भाग-दौड़ में अपने स्कूलों व व्यापारिक मित्रों को भूलते जा रहे हैं. आज हम उन रिश्तों को भी भुलाते जा रहे हैं. जो हमारे जन्म होने के बाद या विवाह के बाद बनते हैं. वैसे तो हर एक इंसान का हर दुसरे इंसान से इंसानियत का रिश्ता है. मगर हम आज मंदिर-मस्जिद, चर्च-गुरद्वारों में बँटकर "इंसानियत" जैसे पवित्र शब्द की गरिमा को भुलाते जा रहे हैं. "इंसानियत" जैसे पवित्र शब्द की गरिमा को बनाये रखने हेतु ही "शकुन्तला प्रेस ऑफ़ इंडिया प्रकाशन" परिवार ने एक "आपको मुबारक हो" ब्लॉग बनाकर अपने सभी स्कूलों व व्यापारिक मित्रों को एक मंच पर एकत्रित करने की एक छोटी-सी कोशिश की. जो समय की भागदौड़ में कहीं पीछे छुड़ते जा रहे  थें . काफी ऐसे मित्र होते हैं जिनसे अक्सर शादी या दुखद घटना के अवसर पर ही मुलाकात होती हैं. तब समय की कमी से अक्सर बातचीत का कम ही अवसर मिलता है. उपरोक्त ब्लॉग बनाने का मात्र एक ही उद्देश्य है. हम सभी एक बंधन में बधें रहे.  
मेरा आप सभी से विनम्र अनुरोध हैं कि-उपरोक्त ब्लॉग के सन्दर्भ में अपनी बहुमूल्य  शिकायतें सुझाव फ़ोन, ईमेल और पत्र द्वारा भेजकर मेरा मार्गदर्शन करें. आप आप इसकी सुन्दरता हेतु अपनी नवीनतम फोटो शीघ्रता से भिजवायें. 
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