आज हाईटेक दुनियां की भाग-दौड़ में अपने स्कूलों व व्यापारिक मित्रों को भूलते जा रहे हैं.आज हम उन रिश्तों को भी भुलाते जा रहे हैं.जो हमारे जन्म होने के बाद या विवाह के बाद बनते हैं.वैसे तो हर एक इंसान का हर दुसरे इंसान से इंसानियत का रिश्ता है.मगर हम आज"इंसानियत" जैसे पवित्र शब्द की गरिमा को भुलाते जा रहे हैं."इंसानियत" जैसे पवित्र शब्द की गरिमा को बनाये रखने हेतु ही "प्रकाशन" परिवार ने एक ब्लॉग बनाकर अपने सभी मित्रों को एक मंच पर एकत्रित करने की एक छोटी-सी कोशिश की.
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आईये! हम अपनी राष्ट्रभाषा हिंदी में टिप्पणी लिखकर भारत माता की शान बढ़ाये.अगर आपको हिंदी में विचार/टिप्पणी/लेख लिखने में परेशानी हो रही हो. तब नीचे दिए बॉक्स में रोमन लिपि में लिखकर स्पेस दें. फिर आपका वो शब्द हिंदी में बदल जाएगा. उदाहरण के तौर पर-tirthnkar mahavir लिखें और स्पेस दें आपका यह शब्द "तीर्थंकर महावीर" में बदल जायेगा. कृपया "आपको मुबारक हो" ब्लॉग पर विचार/टिप्पणी/लेख हिंदी में ही लिखें.
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शनिवार, दिसंबर 24, 2011
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